जेपी 1932 में पहली बार गिरफ्तार किए जाते हैं। उन्हें नासिक सेंट्रल जेल में रखा जाता है। उससे पहले वह भूमिगत रहकर सशस्त्र संघर्ष की संभावनाओं को तलाश करते हुए नौजवानों के साथ सक्रिय तौर पर जुड़े होते हैं। यह वही दौर है जब सरदार भगत सिंह एवं उनके साथियों को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दिए जाने की सनसनी हवा में फैली हुई है। इससे पहले भगत सिंह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी नामक संगठन का नेतृत्व कर सोवियत संघ सरीखी क्रांति का बिगुल भी बजा चुके हैं।
1933 में पं नेहरू मीनू मसानी को लिखे पत्र में कहते हैं कि मैं कांग्रेस पार्टी में समाजवादी ग्रुप के गठन का स्वागत करूंगा, कांग्रेस पार्टी आर्थिक और सामाजिक बदलाव का भी संगठन बने जो आजादी के बाद नए भारत का निर्माण करे। जेपी के प्रयासों से इस संगठन की भी शुरुआत बिहार से होती है जब पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में 17 मई 1934 को आचार्य नरेंद्र देव की अध्यक्षता में समाजवादियों का एक सम्मेलन आयोजित होता है, जेपी इस संगठन के महासचिव बनाए जाते हैं। इसमें अच्युत पटवर्धन, मीनू मसानी, अशोक मेहता, एन.जी. गोरे, यूसुफ मेहर अली आदि शामिल हैं।
आजादी के आंदोलन के नायक के रूप में उनका पुनर्जन्म होता है जब वे भारत छोड़ो आंदोलन के चलते हजारीबाग जेल की 17 फुट ऊंची दीवार को फांद कर 8 नवंबर 1942 को जेल तोड़ने में कामयाब हो जाते हैं। भूमिगत रहकर वह एक शीर्षस्थ नेता के रूप में युवाओं को संगठित कर एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन संचालित करते हैं और इसी क्रम में 1943 में नेपाल में डॉ. लोहिया के साथ गिरफ्तार होकर लाहौर सेंट्रल जेल लाए जाते हैं और वहां भीषण यातनाओं का शिकार बनते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध में साम्यवादियों की भूमिका उन्हें गांधी के करीब और कम्युनिस्टों से दूर कर देती है। 21 अप्रैल 1946 को जेल से छूटने के बाद पटना के गांधी मैदान में उनका अभिनंदन आयोजित किया जाता है।
1947 आते-आते संविधान सभा के निर्माण, भारत-पाक बंटवारा आदि सवालों पर समाजवादी पं. नेहरू से निराश हैं। गांधी जी की इच्छा के विरुद्ध जाकर 1948 में सभी समाजवादी नासिक में एक सम्मेलन आयोजित कर अलग दल का निर्माण करते हैं। 1952 में पं. नेहरू के आभामंडल से टकराकर उनकी चुनाव में बुरी हार होती है और जेपी सक्रिय राजनीति को तिलांजलि देकर भूदान की राह पकड़ते हैं। फिर 1974 में लोकनायक के रूप में उनका पुनर्जन्म होता है, जब वह संपूर्ण क्रांति के वाहक बनकर उभरते हैं। जेपी के कार्य सदा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें